भकूट दोष तब बनता है जब वर-वधू की चंद्र राशियाँ 6/8, 5/9, या 2/12 की स्थिति में हों। यह वैवाहिक सुख, संतान-सुख, और आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है। परंतु शास्त्रों में 4+ अपवाद हैं — दोनों के राशि-स्वामी मित्र हों, नक्षत्र मेल हो, आदि — जिनसे दोष निरस्त हो जाता है।
भकूटे दोषे जाते लग्नदृष्ट्या दोषनाशनम्।
— भकूट दोष होने पर भी लग्न की शुभ दृष्टि से दोष नष्ट हो जाता है।
📿 मानसागरी, अध्याय 6
मैंने कई जोड़े देखे हैं जिनमें भकूट दोष था परंतु एक ही गण, एक ही नक्षत्र-पाद थे — और बहुत सुखी विवाह हुए। भकूट को isolated मत देखें — पूरा अष्टकूट + व्यक्तिगत कुंडली देखें।
भकूट दोष होने पर — महामृत्युंजय जप, सत्यनारायण कथा, और दोनों जीवनसाथी मिलकर 11 गुरुवार का व्रत। ब्राह्मण भोजन और दान। पंडित से दोष-निरसन पूजा।
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