नाड़ी दोष तब बनता है जब वर-वधू दोनों की नाड़ी एक ही हो (आदि, मध्य, या अंत्य)। तीनों नाड़ियाँ शरीर की प्राण-वायु से संबंधित हैं। समान नाड़ी से संतान-स्वास्थ्य या वैवाहिक जीवन प्रभावित हो सकता है। परंतु शास्त्रों में 6+ अपवाद भी हैं जिनसे दोष निरस्त हो जाता है।
नाड्यैक्ये जायते दोषो विवाहे महत्तरः।
— समान नाड़ी होने पर विवाह में महान दोष उत्पन्न होता है।
📿 मानसागरी, अध्याय 7
अधिकांश ज्योतिषी नाड़ी दोष देखकर ही 'विवाह नहीं' कह देते हैं — यह अधूरा निर्णय है। मेरे 33 वर्षों में मैंने अनेक ऐसे जोड़े देखे जिनमें नाड़ी दोष था परंतु अपवाद-नियम लागू था, और वे आज सुखी हैं। पूर्ण कुंडली देखे बिना निर्णय न लें।
यदि नाड़ी दोष है और अपवाद नहीं लगता — विशेष महामृत्युंजय जप, नाड़ी-दोष शांति पूजा, और ब्राह्मण-दान का विधान है। शास्त्र-सम्मत पंडित से ही करवाएं।
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