होमनवग्रह शांति उपाय

मैं कौन सा या क्या उपाय करूँ

सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु — नवग्रहों के व्यवहारिक उपाय, मन्त्र, रुद्राक्ष और रत्न

आचार्य Vivek Mudgal जी के 33+ वर्षों के अनुभव और शास्त्रीय परम्परा (Brihat Parashara Hora Shastra, फलदीपिका, सारावली) पर आधारित प्रामाणिक वैदिक ज्योतिष उपाय।

किस ग्रह का उपाय करें — संक्षेप में

यदि आपकी कुंडली में कोई ग्रह कमज़ोर या महादशा / अंतर्दशा चल रही है, तो उस ग्रह के नीचे दिए गए मन्त्र, रुद्राक्ष, रत्न और सेवा-दान मिलकर पूर्ण ग्रह शांति उपाय बनाते हैं।

शुरुआत कैसे करें? सबसे पहले उस ग्रह से जुड़ा दिन चुनें (उदा. शनि → शनिवार), उसका मन्त्र 108 बार जपें, और उस दिन का सरल दान करें। रत्न धारण से पहले विद्वान ज्योतिषी से कुंडली विश्लेषण अवश्य करवाएँ।

सूर्य ग्रह आत्मा, पिता, सरकारी कार्य, मान-सम्मान, राज्याश्रय और नेतृत्व का कारक है। जब कुंडली में सूर्य कमजोर, नीच या पाप-प्रभाव में हो, तब आत्मविश्वास, स्वास्थ्य, career और पिता से संबंध — सब प्रभावित होते हैं। नीचे दिए गए सूर्य ग्रह शांति उपाय आचार्य Vivek Mudgal जी के 33+ वर्षों के अनुभव और पराशर परम्परा से प्रामाणिक हैं।

व्यवहारिक एवं दैनिक जीवन के उपाय

  • पिता अथवा पिता तुल्य व्यक्तियों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें — विशेषकर रविवार सुबह।
  • भगवान सूर्य को तांबे के लोटे से सूर्योदय से पहले 3 बार और सूर्योदय के बाद 4 बार अर्घ्य दें।
  • रविवार को नमक का सेवन न करें — यह उपाय पिता का सम्मान बढ़ाने के लिए विशेष प्रभावी है।
  • सरकारी कार्य आरंभ करने से पहले सूर्य देव को मन-ही-मन प्रणाम करें।
  • सुबह सूर्योदय के समय कुछ मिनट सूर्य की ओर मुख करके ध्यान करें।

मन्त्र

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥

प्रतिदिन सूर्योदय के समय कम से कम 108 बार जप करें। रविवार को विशेष फलदायी।

रुद्राक्ष

1 मुखी / 12 मुखी रुद्राक्ष — रविवार सुबह स्नान के बाद धारण करें।

रत्न

माणिक (Ruby) — ज्योतिषीय परामर्श के बाद ही धारण करें। 3-5 carat, सोने में, अनामिका अंगुली में, रविवार सूर्योदय के समय।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

नवग्रह उपाय से जुड़े सबसे आम सवालों के सीधे जवाब।

महत्वपूर्ण सूचना

"रत्न धारण करने से पहले विद्वान् वैदिक ज्योतिषीय ब्राह्मण से अपनी जन्म कुंडली का विश्लेषण अवश्य करवाएँ, क्योंकि गलत रत्न धारण करने से लाभ के स्थान पर हानि होने की संभावना होती है।"

— आचार्य Vivek Mudgal | 33+ वर्षों का पराशरीय अनुभव | फरीदाबाद

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