अष्टकूट के 8 कूटों में अंक भिन्न हैं — वर्ण(1), वश्य(2), तारा(3), योनि(4), ग्रह मैत्री(5), गण(6), भकूट(7), नाड़ी(8)। नाड़ी सर्वोच्च 8 अंक की होने से 'सर्वाधिक महत्वपूर्ण' मानी जाती है — विशेष रूप से संतान और स्वास्थ्य के लिए। परंतु पराशर शास्त्र में सभी 8 कूटों का संतुलन देखा जाता है।
नाड्यैक्यं भकूटे दोषो विवाहे सर्वथा त्याज्यः।
— नाड़ी एकता और भकूट दोष विवाह में पूर्णतः त्याज्य है।
📿 मानसागरी, अध्याय 7
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