विजयादशमी 2026: दशहरा कब है? शस्त्र-शास्त्र पूजन, पूजा विधि, विजय मुहूर्त और जौ के अंकुर का महत्व
विजयादशमी 2026 का पर्व दिल्ली-NCR के पंचांग अनुसार मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन विजय मुहूर्त दोपहर 1:59 से 2:45 बजे तक है। शस्त्र-शास्त्र पूजन, शमी वृक्ष पूजा, अपराजिता देवी की आराधना और जौ के अंकुर रखने की लोकपरंपरा का विशेष महत्व है। दशहरा पर पूजा-विधि क्षेत्रीय परंपराओं से प्रभावित होती है।
- विजयादशमी 2026 मंगलवार, 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी।
- विजय मुहूर्त दोपहर 1:59 से 2:45 बजे तक दिल्ली में उपलब्ध रहेगा।
- शस्त्र-शास्त्र पूजन, शमी पूजा और अपराजिता देवी की आराधना का विशेष महत्व है।
- नवरात्रि में उगे जौ के अंकुर भाई के कान पर रखने की परंपरा कुछ क्षेत्रों में प्रचलित है।
- दशहरा सत्य की विजय, धर्म, साहस और सद्भाव का संदेश देता है।
🕉️ परिचय
विजयादशमी, जिसे दशहरा भी कहा जाता है, असत्य पर सत्य की विजय और अधर्म पर धर्म की जय का पर्व है। यह दिन भगवान श्रीराम के रावण पर विजय और देवी दुर्गा की महिषासुर पर जीत की स्मृति में देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। शस्त्र-शास्त्र पूजन, शमी और अपराजिता देवी की पूजा तथा नवरात्रि में उगाए गए जौ के अंकुरों का विशेष महत्व है। दशहरा शुभ आरंभ, साहस, विवेक और सामाजिक-धार्मिक उत्साह का प्रतीक पर्व है।
📅 तिथि व मुहूर्त
तिथि: मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 से 2:45 बजे तक
अपराह्न पूजा काल: दोपहर 1:14 से 3:30 बजे तक
इन समयों की गणना दिल्ली-NCR के पंचांग अनुसार की गई है। अन्य स्थानों के लिए स्थानीय पंचांग अनुसार मुहूर्त की गणना करें।
📜 पौराणिक कथा
दशहरा से जुड़ी दो प्रमुख पौराणिक कथाएँ हैं — पहली, भगवान श्रीराम की लंका के रावण पर विजय और अयोध्या वापसी की; दूसरी, देवी दुर्गा का महिषासुर मर्दन। दोनों ही कथाएँ संदेश देती हैं कि धर्म, सत्य और संयम से अंतत: विजय अवश्य प्राप्त होती है। इस दिन श्रीराम ने अधर्म का नाश किया और देवी दुर्गा ने राक्षस (महिषासुर) का संहार किया। भारत में दशहरा सामूहिक आस्था, शौर्य और नारी-शक्ति के समन्वय का प्रतीक बन गया है।
📚 शास्त्रीय संदर्भ
धर्मसिन्धु, निर्णयसिन्धु, एवं पुराणों में वर्णित व्रत-निर्णय सिद्धांतों के आधार पर यह निष्कर्ष प्रस्तुत किया गया है।
🛕 पूजा विधि
- प्रात:काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को शुद्ध करें।
- भगवान श्रीराम, देवी दुर्गा या अपने इष्टदेव का ध्यान करें।
- दीपक प्रज्वलित करें; रोली, अक्षत, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें।
- शस्त्र-शास्त्र या कार्य-उपकरणों को साफ कर उनकी मिट्टी, सिन्दूर, अक्षत से पूजा करें।
- शमी वृक्ष के नीचे जाकर, उसे जल, पुष्प आदि अर्पित करें और प्रणाम करें।
- यदि अपराजिता देवी की प्रतिमा/पौधा उपलब्ध हो, तो उसकी विधिपूर्वक पूजा करें।
- विजयादशमी के दिन उत्तर भारत के कुछ परिवारों में बहन अपने भाई के कान पर नवरात्र में उगाए गए अंकुरित जौ रखती है। (परंपरा अनुसार)।
- आरती करें व सुख, विजय, सद्भाव और विवेक की कामना करें।
🍚 व्रत नियम
- दशहरा पर कई लोग नवरात्र के उपवास(व्रत) का पारण करते हैं।
- पूरे दिन सात्विक आहार लें और मन, वचन, कर्म से संयमित रहें।
- शक्ति, अन्न, औजार, शस्त्र आदि की पूजा अवश्य करें।
- यदि व्रत रखते हैं, तो मुहूर्त के अनुसार पूजन के बाद ही पारण करें।
- व्यसन, क्रोध, विवाद, और अशुद्ध भाषण से बचें। शुभ कार्य, दान आदि करें।
🌅 पारण समय
यदि आप नवरात्रि व्रत कर रहे हों, तो दशमी तिथि में विजय मुहूर्त अथवा अपराह्न पूजा काल के बाद व्रत का पारण करें। 2026 में दिल्ली-NCR में उपयुक्त पारण का समय 3:30 बजे अपराह्न के बाद है। अन्य स्थानों पर पारण-समय पंचांग देखें।
✨ आध्यात्मिक महत्व
दशहरा केवल बाह्य विजय का उत्सव नहीं, बल्कि हमारे भीतर के अहंकार, क्रोध, लोभ और नकारात्मक वृत्तियों पर विजय पाने का संदेश देता है। यह पर्व शक्ति, विवेक, ज्ञान, अनुशासन और सामाजिक कर्तव्यों के स्मरण का श्रेष्ठ अवसर है। शस्त्र-पूजन हमें सत्कर्म, शास्त्र-पूजन विवेक और जौ के अंकुर जीवन की निरंतरता, ऊर्जा और शुभता का प्रतीक हैं। परिवार, समाज व राष्ट्र में एकता, सद्भाव और धर्माचरण की प्रेरणा विजयादशमी से मिलती है।
❓ FAQ
- विजयादशमी 2026 कब मनाई जाएगी?
दिल्ली-NCR पंचांग के अनुसार मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी मनाई जाएगी। - दशहरा के विजय मुहूर्त का समय क्या है?
विजय मुहूर्त दोपहर 1:59 से 2:45 बजे तक रहेगा (दिल्ली समय)। - शस्त्र-शास्त्र पूजन का महत्व क्या है?
यह शक्ति, सुरक्षा और जिम्मेदार आचरण का प्रतीक है, पारंपरिक रूप से कर्म के औजारों की पूजा का भी विधान है। - क्या हर जगह दशहरा एक ही तिथि को मनाया जाता है?
भारत के अलग-अलग प्रांतों, विशेषकर विदेशों में पंचांग के अनुसार तिथि-समय में भिन्नता हो सकती है। - शमी पूजा किसलिए की जाती है?
शमी वृक्ष को विजय, समृद्धि और कष्ट-निवारण हेतु पूजा जाता है; यह स्कन्द पुराण आदि में वर्णित है। - अपराजिता देवी की पूजा क्यों की जाती है?
विजय, साहस और शुभारंभ हेतु अपराजिता देवी की पूजा की जाती है; यह पारंपरिक मान्यता है। - क्या दशहरा पर नवरात्रि के जौ के अंकुर रखने की कोई विशेष कथा है?
यह प्रथा मुख्यतः उत्तर भारत में भाई की मंगलकामना हेतु लोकरीति रूप में प्रचलित है; शास्त्रों में स्पष्ट विधान नहीं मिलता। - दशहरा पर कौन-से शुभ कार्य आरंभ कर सकते हैं?
शुभ कार्य, नया व्यापार, अध्ययन, वाहन/गृह प्रवेश आदि इस दिन आरंभ करना शुभ माना जाता है। - दशहरा की पूजा विधि में क्या-क्या चाहिए?
इष्ट-प्रतिमा, दीपक, रोली, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, औजार या शस्त्र, शमी-पत्र आदि प्रयुक्त होते हैं। - क्या दशहरा पर व्रत रखा जा सकता है?
हाँ, नवरात्र व्रत का समापन दशहरा को किया जाता है; आप इच्छा अनुसार उपवास रख सकते हैं। - परिवार में आचार का क्या महत्व है?
दशहरे पर केवल पूजन नहीं, चरित्र में भी सत्य, साहस, विवेक व धर्म की विजय का संकल्प लें। - अगर विजय मुहूर्त के समय पूजा छूट जाए तो क्या करें?
आप अपराह्न काल में कोई भी शुभ कार्य, पूजन कर सकते हैं; मन की श्रद्धा, आचरण प्रमुख है। - क्या श्रीराम की पूजा आवश्यक है, या देवी दुर्गा की भी कर सकते हैं?
दोनों ही पूजन पारंपरिक रूप से उचित हैं; अपनी कुल-परंपरा/श्रद्धा अनुसार पूजा करें। - दशहरा पर दान करना क्यों शुभ है?
दान-पुण्य से समाज में समरसता, करुणा और शुभ चक्र सशक्त होता है; यह शास्त्रसम्मत है। - क्या बच्चें भी शस्त्र-पूजन कर सकते हैं?
हाँ, उन्हें परिवार के बड़े सदस्यों की देखरेख में पूजा की परंपरा, औजारों का महत्व समझाना चाहिए।
🏁 निष्कर्ष
विजयादशमी 2026 धर्म, साहस, चरित्र परिवर्तन और सामाजिक उज्ज्वलता का विराट पर्व है। शस्त्र-शास्त्र पूजन, शमी पूजा और मंगलकारी परंपराएँ हमें जीवन में सद्भाव, संयम और विवेक की ओर प्रेरित करती हैं। सत्य, कर्तव्य और नव-प्रयास का संकल्प लेकर दशहरा हर्षोल्लास से मनाएँ! जय श्रीराम।
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