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Vivek Mudgal AstrologerVivek Mudgal Astrologer Puja 1 October 2026 Last updated 1 October 2026

शारदीय नवरात्रि 2026: 11 अक्टूबर को घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

शारदीय नवरात्रि 2026 का शुभारंभ 11 अक्टूबर, रविवार को हो रहा है। घटस्थापना का सबसे उत्तम मुहूर्त दोपहर में अभिजित काल—12:09 से 12:58 बजे तक रहेगा। इस अवधि में कलश स्थापना, जौ बुआई व विधिवत पूजन शास्त्रसम्मत है। नवरात्रि का आरंभ माँ दुर्गा की आराधना, शक्ति-साधना, उपासना-व्रत एवं जीवन में नई ऊर्जा के संचार हेतु अत्यंत शुभ माना जाता है।

शारदीय नवरात्रि 2026: 11 अक्टूबर को घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

शारदीय नवरात्रि 2026: 11 अक्टूबर को घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

सीधा उत्तर

शारदीय नवरात्रि 2026 का शुभारंभ 11 अक्टूबर, रविवार को हो रहा है। घटस्थापना का सबसे उत्तम मुहूर्त दोपहर में अभिजित काल—12:09 से 12:58 बजे तक रहेगा। इस अवधि में कलश स्थापना, जौ बुआई व विधिवत पूजन शास्त्रसम्मत है। नवरात्रि का आरंभ माँ दुर्गा की आराधना, शक्ति-साधना, उपासना-व्रत एवं जीवन में नई ऊर्जा के संचार हेतु अत्यंत शुभ माना जाता है।

मुख्य निष्कर्ष
  • शारदीय नवरात्रि 2026 की घटस्थापना 11 अक्टूबर, रविवार को अभिजित मुहूर्त (12:09–12:58) में करें।
  • घटस्थापना के साथ जौ (यव) का वपन वैदिक मंत्रोच्चार सहित अनिवार्य व धार्मिक दृष्टि से मंगलकारी है।
  • माँ दुर्गा की उपासना, सात्विक व्रत तथा नवदुर्गा पूजा जीवन में शक्ति, सुख, समृद्धि व शुभफल देती है।
  • घर व पूजा स्थान शुद्ध रखकर शास्त्रीय विधि से कलश-स्थापना करें, जौ नियमित जल दें।
  • श्रद्धापूर्वक अनुष्ठान करने से परिवार में कल्याण, आरोग्य एवं आध्यात्मिक उत्थान होता है।

🕉️ परिचय

शारदीय नवरात्रि हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष की सर्वाधिक महत्वपूर्ण देवी-उपासना की अवधि है। 2026 में यह पर्व 11 अक्टूबर, रविवार से आरंभ होकर नौ दिनों तक चलेगा, जब माँ दुर्गा के विविध स्वरूपों की आराधना की जाती है। शक्ति और भक्ति का यह पर्व भारत जैसे धार्मिक देश में, जीवन के हर क्षेत्रों को उज्ज्वल करने का माध्यम है। दुबई जैसे जगहों में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह विशेष सामूहिक और आध्यात्मिक जुड़ाव का समय है।

📅 तिथि व मुहूर्त

• नवरात्रि प्रारंभ: 11 अक्टूबर 2026, रविवार (आश्विन शुक्ल प्रतिपदा)
• घटस्थापना मुहूर्त: दोपहर 12:09 बजे से 12:58 बजे तक (अभिजित मुहूर्त, कुल अवधि ~49 मिनट)
• मुहूर्त उपयोगिता: शास्त्रों के अनुसार घटस्थापना में अभिजित मुहूर्त विशेष पुण्यकारी है।
• जौ बुआई: घटस्थापना के समय शुद्धता के साथ जौ अथवा सप्तधान्य का वपन अवश्य करें।

📜 पौराणिक कथा

शारदीय नवरात्रि की उत्पत्ति देवी पुराण, मार्कण्डेय पुराण एवं दुर्गासप्तशती में वर्णित महिषासुरमर्दिनी कथा से जुड़ी है। श्री दुर्गा ने असुरों के आतंक से धरती को मुक्त कराने के लिए 9 दिनों तक युद्ध कर महिषासुर का संहार किया था। इसी विजय को शक्ति उपासना एवं नारी के दिव्य स्वरूप के रूप में नवरात्र के नौ दिनों में पूज्यते है। यह पर्व अधर्म पर धर्म की जीत, नकारात्मकता पर सकारात्मकता तथा आत्मशक्ति के जागरण की प्रेरणा देता है।

📚 शास्त्रीय संदर्भ

धर्मसिन्धु, निर्णयसिन्धु, देवीपुराण आदि में वर्णित व्रत-निर्णय सिद्धांतों के आधार पर यह निष्कर्ष प्रस्तुत किया गया है।

🛕 पूजा विधि

1. शुद्धिकरण: घर व पूजा स्थान की सफाई करके स्वयं भी स्नान करें।
2. कलश स्थापना: शुद्ध मिट्टी/पीतल के स्वच्छ पात्र में शुद्ध मिट्टी या रेत डालें, उसमें स्वच्छ जौ (यव) के बीज बोएँ।
3. वेद मंत्र: जौ बोने के समय निम्न वैदिक मंत्र का जाप करें—
ॐ धान्यमसि धिनुहि देवान् प्राणाय त्वोदानाय त्वा व्यानाय त्वा।
दीर्घामनु प्रसितिमायुषे धां देवो वः सविता हिरण्यपाणिः प्रतिगृभ्णात्वच्छिद्रेण पाणिना॥

4. कलश पूजन: पात्र के मध्य में कलश स्थापित कर उसमें शुद्ध जल भरे, पञ्चपल्लव: कलश-स्थापना में परंपरागत रूप से अश्वत्थ (पीपल), उदुम्बर (गूलर), प्लक्ष (पाकड़), चूत (आम) और न्यग्रोध (वट) के पल्लवों का विधान मिलता है। इन्हें वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कलश पर स्थापित किया जाता है।-इसके पश्चात् कलश के मुख पर पञ्चपल्लव स्थापित करें। पञ्चपल्लव के ऊपर लाल वस्त्र एवं मौली से विधिवत् आवेष्टित जटायुक्त नारियल रखें। इस प्रकार पञ्चपल्लव सहित नारियल से कलश की स्थापना पूर्ण करें।
5. नवग्रह, देवी की प्रतिमा/चित्र की स्थापना करें।
6. दीप, धूप, पुष्प, गंध, नैवेद्य इत्यादि से माँ दुर्गा का आह्वान एवं पूजन करें।
7. प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती पाठ, आरती, पुष्पांजलि करें।

🍚 व्रत नियम

नवरात्र के नौ दिनों तक सात्विकता, ब्रह्मचर्य, संयम व शुद्ध आहार का पालन करें। केवल फलाहार, दुग्ध, साबूदाना, फल, कुट्टू, सिंघाड़ा व्रत के उपयुक्त हैं। प्याज-लहसुन, तामसिक भोजन, मद्यादि त्याज्य है। प्रात: एवं संध्या में आरती, पूजन व जप अनिवार्य करें। माताओं के लिए सम्भव हो तो अष्टमी या नवमी तिथि पर नवरात्रि की साधना में नवकन्या पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। अपनी कुल-परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार नौ कन्याओं का विधिवत् पूजन कर उन्हें भोजन कराना शुभ माना जाता है। कन्याओं को देवी के स्वरूप के रूप में सम्मान देकर यथाशक्ति दक्षिणा एवं उपहार अर्पित करें।

🌅 पारण समय

नवरात्र व्रत पारण: नवमी तिथि पूर्ण होने के पश्चात 20 अक्टूबर 2026 को प्रातः कन्या पूजन के उपरांत, पारण (व्रत तोड़ना) किया जाता है।
आदर्श समय: प्रात: 7:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक (स्थानीय समय अनुसार)।
विधान: सर्वप्रथम माँ दुर्गा का पूजन एवं आरती करें। इसके बाद कन्याओं का विधिवत् पूजन कर उन्हें भोजन कराएँ, यथाशक्ति दक्षिणा एवं उपहार अर्पित करें तथा उनका आशीर्वाद लें। तत्पश्चात् श्रद्धापूर्वक नवरात्रि व्रत का पारण करें।

✨ आध्यात्मिक महत्व

नवरात्र शक्ति-साधना का पर्व है। घटस्थापना एवं जौ का वपन माँ के प्रसादस्वरूप वृद्धि, अखंड ऊर्जा, सिद्धि, आयु एवं शुद्ध चेतना का प्रतीक है। प्रतिदिन की पूजा-उपासना मानसिक संतुलन, आत्मविश्वास, नकारात्मकता का शमन एवं जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में नवचेतना का संचार करती है। प्रवासी भारतियों के लिए भी यह पर्व सांस्कृतिक-आध्यात्मिक पहचान को सुदृढ़ करता है।

❓ FAQ

  • 1. शारदीय नवरात्र 2026 कब से कब तक है?
    11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक शारदीय नवरात्रि मनाई जाएगी।
  • 2. घटस्थापना का सर्वोत्तम मुहूर्त क्या है?
    11 अक्टूबर 2026, रविवार को दोपहर 12:09 से 12:58 बजे तक अभिजित मुहूर्त में घटस्थापना सर्वोत्तम है।
  • 3. घटस्थापना में जौ (यव) क्यों बोते हैं?
    जौ को शुभ अंकुरण, समृद्धि और जीवनशक्ति का प्रतीक माना जाता है; यह शास्त्रीय विधान भी है।
  • 4. घटस्थापना का शास्त्रीय विधान क्या है?
    मिट्टी में जौ बोकर कलश स्थापना करें, मंत्रोच्चार के साथ माँ दुर्गा का आह्वान करें।
  • 5. कलश में कौन-सी वस्तुएँ रखें?
    शुद्ध जल, पञ्चपल्लव, अक्षत, सुपारी, चाँदी या स्वर्ण का सिक्का, नारियल, हल्दी आदि।
  • 6. नवरात्र में कौन-से व्रत नियम मान्य हैं?
    सात्विक आहार, संयम, ब्रह्मचर्य, फलाहार, दूग्ध, साबूदाना आदि व्रत के प्रमुख नियम हैं।
  • 7. व्रत पारण कब व कैसे करें?
    अष्टमी/नवमी पर कन्या पूजन के उपरांत माँ दुर्गा को विदा कर व्रत पूर्ण करें।
  • 8. क्या नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ आवश्यक है?
    हाँ, नित्य दुर्गा सप्तशती, सिद्ध कुञ्जिका स्तोत्र, देवी कवच का पाठ करना विशेष रूप से शुभ एवं श्रेष्ठ माना गया है।
  • 9. क्या नवरात्रि में यात्रा या कार्य कर सकते हैं?
    संयम एवं श्रद्धा रखें; अत्यावश्यक कार्यों के लिए यात्रा कर सकते हैं, पर पूजा-नियम न छोड़ें।
  • 10. जौ की वृद्धि का क्या अर्थ माना गया है?
    जौ की स्वस्थ वृद्धि को जीवन-वृद्धि, समृद्धि, व अनुष्ठान की सफलता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इसे नवरात्रि की साधना के सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जाता है।
  • 11. क्या नवरात्रि में तेल, मसाले, प्याज-लहसुन वर्जित है?
    शुद्ध सात्विकता के लिए नवरात्रि में इनका सेवन त्याज्य है।
  • 12. माँ दुर्गा को कौन-कौन से भोग अर्पित करें?
    फल, नैवेद्य, नारियल, मिश्री, फल-फूल का भोग अर्पण करें।
  • 13. दुर्गा पूजा में कौन-से रंग के वस्त्र उत्तम हैं?
    पीला, लाल, गुलाबी, सफेद जैसे शुभ रंगों के वस्त्र पहनना उत्तम माना गया है।
  • 14. दुबई जैसे विदेश में नवरात्रि कैसे मनाएँ?
    घर के पूजा स्थान में इसी विधि से घटस्थापना व पूजन करें, सामूहिकता हेतु भारतीय संगठनों से जुड़ें।
  • 15. नवरात्रि के दौरान क्या उपवास आवश्यक है?
    हाँ, साधारण व्यक्ति फलाहार ले सकते हैं, गम्भीर रोगी नियम अनुसार आहार लें।

🏁 निष्कर्ष

शारदीय नवरात्र 2026 शक्ति, श्रद्धा और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत पर्व है। 11 अक्टूबर को घटस्थापना और वैदिक विधि से माँ दुर्गा का पूजन करने पर समृद्धि, सुख, आत्मबल और आध्यात्मिक उत्थान की प्राप्ति होती है। भारत और विदेशों में रह रहे भक्तों के लिए यह नवचेतना, अनुशासन व भक्ति का नवप्रभात है।

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Vivek Virat Mudgal

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