विंशोत्तरी दशा 120 वर्षों का जीवन-चक्र है जिसमें 9 ग्रहों की दशाएँ क्रमवार आती हैं — सूर्य 6, चंद्र 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19, बुध 17, केतु 7, शुक्र 20 वर्ष। जिस ग्रह की दशा चल रही हो, उसी के अनुसार जीवन की दिशा, सुख-दुख, और प्रमुख घटनाएं घटित होती हैं।
दशासु सर्वेषु ग्रहाणां फलमादिशेत्।
— सभी ग्रहों की दशाओं में उनके अनुरूप फल होता है।
📿 बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46
मेरा हमेशा यह कहना है — अगली कोई major decision (शादी, business, मकान खरीदना) लेने से पहले अपनी चालू दशा देख लो। 33 साल में मैंने पाया कि शुभ दशा में लिए गए निर्णय 80% सफल होते हैं, अशुभ दशा में 60% फेल। दशा का असर असंख्य है।
अपनी चालू महादशा-अंतर्दशा का स्वामी जानें (ViratAstro Free Kundli से)। उस ग्रह को सशक्त करने के उपाय करें — मंत्र, यंत्र, रत्न, दान। शुभ दशा में आक्रामक निर्णय; कठिन दशा में रक्षात्मक।
हर कुंडली अद्वितीय होती है। 33+ वर्षों के अनुभव के साथ आचार्य Vivek Mudgal आपकी जन्म कुंडली का गहन Parashari विश्लेषण करेंगे।
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