विदेश यात्रा/निवास के लिए — 12वां भाव (विदेश), 9th भाव (long journey), 7th भाव (विदेशी संबंध), 4th भाव (homeland से दूरी)। राहु, शुक्र, चंद्र — विदेश कारक ग्रह। राहु लग्न/12 में, चंद्र 12 में, या 9 भाव का स्वामी 12 में हो — तो विदेश योग प्रबल। दशा-समय भी matter करता है।
व्यये राहौ विदेशे वासः सिद्ध्यति निश्चितम्।
— व्यय भाव (12) में राहु हो तो विदेश-निवास निश्चित होता है।
📿 जातक पारिजात, अध्याय 11
मेरे एक client — engineer थे, बहुत time से USA जाने की कोशिश में, हर बार fail। मैंने कुंडली देखी — विदेश योग strong था, परंतु राहु महादशा 5 साल बाद आनी थी। मैंने कहा — wait करो, prepare करते रहो। 5 साल बाद exactly जैसे ही राहु महादशा आई — पहले attempt में visa, job, सब। दशा-समय key है।
विदेश यात्रा के लिए — राहु यंत्र, 'ॐ रां राहवे नमः' मंत्र, गोमेद रत्न (कुंडली देखकर)। काले-नीले वस्त्र दान। ससुराल/नानी पक्ष से सहायता लें।
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