यह संयोग 'दोहरा संकट' माना जाता है — शनि का धीमा-गहरा प्रभाव और मंगल का तीव्र प्रभाव एक साथ। परंतु शास्त्र कहते हैं कि नियमित उपाय, धैर्य, और शिव-हनुमान की उपासना से व्यक्ति इस period में बहुत मजबूत बनकर निकलता है। यह काल आत्म-शोधन का है।
शनिमंगलयुगेऽपि हनुमत्साधना फलप्रदा।
— शनि और मंगल के युगपत् प्रभाव में भी हनुमान साधना सर्व-फलदायी है।
📿 हनुमद् रहस्य
मेरे एक client — पिछले 5 वर्षों से साढ़ेसाती मध्य phase में, और मांगलिक भी। 2 बार रिश्ते टूटे, business में नुकसान, सब कुछ। मैंने उन्हें कहा — रोज़ हनुमान चालीसा 7 बार + सुंदरकांड साप्ताहिक। 18 महीने में सब कुछ बदल गया। आज वे शादीशुदा, business 3x बढ़ चुका है। शास्त्र काम करते हैं — बस श्रद्धा चाहिए।
रोज़: हनुमान चालीसा 7 बार + 'ॐ हं हनुमते नमः' 108 जप। हर शनिवार: तेल का दीप, काले तिल का दान। हर मंगलवार: हनुमान मंदिर। मासिक: 1 बार सुंदरकांड पाठ।
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