सप्तम भाव में मंगल वैवाहिक जीवन में तनाव, जीवनसाथी से मतभेद, और कभी-कभी विवाह में देरी का कारण बनता है। यह 'सबसे प्रबल मांगलिक स्थिति' मानी जाती है क्योंकि सप्तम भाव सीधा विवाह कारक है। परंतु यदि गुरु या शुक्र की दृष्टि हो तो प्रभाव कम होता है।
जामित्रे भौमयुक्तायां पतिर्भार्या तु क्लेशदा।
— सप्तम भाव में मंगल हो तो पति-पत्नी एक-दूसरे को कष्ट देने वाले होते हैं।
📿 बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 80
33 वर्षों में मैंने पाया है — सप्तम मंगल वाले लोगों में दो extreme होते हैं। एक तो जो शास्त्रोक्त उपाय करते हैं — उनका विवाह बहुत मजबूत और passionate होता है। दूसरे जो उपाय नहीं करते — उनके वैवाहिक संघर्ष आजीवन रहते हैं।
विवाह से पहले — कुम्भ विवाह + मंगल शांति पाठ + 'ॐ अं अंगारकाय नमः' का 21,000 जप। मंगलवार उपवास, हनुमान चालीसा 11 बार। मूँगा रत्न (कुंडली देखकर)।
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