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Vivek Mudgal AstrologerVivek Mudgal Astrologer General 3 September 2026 Last updated 8 October 2026

अजा एकादशी 2026: 7 सितंबर तिथि, पारण समय, पूजा विधि, कथा व लाभ

अजा एकादशी 2026 कब है? जानें 7 सितंबर की तिथि, पारण समय, व्रत के नियम, पूजा विधि, राजा हरिश्चंद्र की कथा, ज्योतिषीय महत्व और वैज्ञानिक कारण।

अजा एकादशी 2026: 7 सितंबर तिथि, पारण समय, पूजा विधि, कथा व लाभ

अजा एकादशी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पारण समय, व्रत नियम, पूजा विधि, कथा और ज्योतिषीय महत्व

अजा एकादशी 2026 भगवान विष्णु को समर्पित महत्वपूर्ण एकादशी व्रतों में से एक है। यह व्रत केवल भोजन का त्याग करने तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि इसे मन, इंद्रियों और विचारों पर संयम, भगवान विष्णु की उपासना तथा आत्मचिंतन का अवसर माना गया है।

इस लेख में जानिए कि अजा एकादशी 2026 कब है, एकादशी तिथि कब शुरू और समाप्त होगी, पारण कब करना है, व्रत में क्या खाएं और क्या न खाएं, चावल क्यों नहीं खाए जाते, निर्जला व्रत जरूरी है या नहीं, भगवान विष्णु की पूजा कैसे करें, अजा एकादशी की कथा क्या है, इसका ज्योतिषीय महत्व क्या माना जाता है और आधुनिक विज्ञान उपवास के बारे में क्या कहता है।

☸ सीधा उत्तर: अजा एकादशी 2026 कब है?

अजा एकादशी सोमवार, 7 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। यह भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी है।

नई दिल्ली के अनुसार एकादशी तिथि 6 सितंबर 2026 को शाम 7:29 बजे शुरू होकर 7 सितंबर 2026 को शाम 5:03 बजे समाप्त होगी। व्रत के पारण का दिन 8 सितंबर 2026, मंगलवार है।

⭐ अजा एकादशी 2026 के मुख्य बिंदु

  • अजा एकादशी: 7 सितंबर 2026, सोमवार
  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 6 सितंबर, शाम 7:29 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 7 सितंबर, शाम 5:03 बजे
  • पारण: 8 सितंबर 2026, मंगलवार
  • पूजा के आराध्य: भगवान विष्णु / श्रीहरि
  • व्रत में सामान्यतः अनाज और चावल से परहेज किया जाता है।
  • निर्जला व्रत सभी के लिए अनिवार्य नहीं है।
  • स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या सात्त्विक व्रत किया जा सकता है।

📖 इस लेख में क्या जानेंगे?

  1. अजा एकादशी 2026 की तिथि
  2. एकादशी तिथि का प्रारंभ और समाप्ति
  3. अजा एकादशी का पारण समय
  4. अजा एकादशी का शुभ समय और पूजा का समय
  5. एकादशी का शास्त्रीय महत्व
  6. नारद पुराण का एकादशी श्लोक
  7. अजा एकादशी की पूजा विधि
  8. अजा एकादशी की कथा
  9. व्रत में क्या खाएं और क्या न खाएं
  10. क्या चावल खाना मना है?
  11. क्या निर्जला व्रत जरूरी है?
  12. ज्योतिषीय दृष्टि से अजा एकादशी
  13. व्रत का वैज्ञानिक दृष्टिकोण
  14. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
  15. निष्कर्ष

1. अजा एकादशी 2026 कब है?

वर्ष 2026 में अजा एकादशी 7 सितंबर, सोमवार को है। पंचांग की गणना के अनुसार यह भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी है।

इसलिए यदि आपने कहीं 7 अगस्त 2026 को अजा एकादशी लिखा हुआ देखा है, तो उस तारीख की दोबारा जांच करना आवश्यक है। 2026 में अगस्त की एकादशी और सितंबर की अजा एकादशी अलग-अलग तिथियां हैं।

2. अजा एकादशी 2026 की तिथि और समय

विवरण समय
अजा एकादशी 7 सितंबर 2026, सोमवार
एकादशी तिथि प्रारंभ 6 सितंबर 2026, शाम 7:29 बजे
एकादशी तिथि समाप्त 7 सितंबर 2026, शाम 5:03 बजे
पारण का दिन 8 सितंबर 2026, मंगलवार

नोट: ऊपर दिए गए समय नई दिल्ली के अनुसार हैं। अन्य शहरों में सूर्योदय और स्थानीय पंचांग गणना के कारण समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

3. अजा एकादशी 2026 का पारण कब होगा?

अजा एकादशी व्रत का पारण 8 सितंबर 2026, मंगलवार को द्वादशी तिथि में किया जाएगा।

नई दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग गणना में पारण का समय सुबह 6:02 बजे से 10:13 बजे तक दिया गया है। वास्तविक पारण का उपयुक्त समय स्थानीय पंचांग और सूर्योदय के अनुसार देखना चाहिए।

व्रत खोलते समय जल्दबाजी में बहुत अधिक भोजन करना उचित नहीं माना जाता। पहले जल या हल्के सात्त्विक आहार से शुरुआत करना बेहतर रहता है।

4. अजा एकादशी का शुभ मुहूर्त और पूजा का समय

एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा के लिए प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद पूजा करना उत्तम माना जाता है। पूजा के लिए किसी एक अत्यंत सीमित मिनट को ही अनिवार्य मानने के बजाय स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के अनुसार पूजा का समय निर्धारित करना अधिक उचित है।

महत्वपूर्ण: अभिजित मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त अथवा अन्य विशिष्ट मुहूर्त शहर के अक्षांश, देशांतर और स्थानीय सूर्योदय के अनुसार बदलते हैं। इसलिए किसी दूसरे शहर का समय अपने शहर पर सीधे लागू न करें।

5. एकादशी का शास्त्रीय महत्व

एकादशी व्रत का महत्व केवल लोकपरंपरा तक सीमित नहीं है। पुराण साहित्य में एकादशी को भगवान विष्णु की प्रिय तिथि के रूप में वर्णित किया गया है। नारद पुराण के पूर्वार्ध के अध्याय 23 में एकादशी के महत्व और व्रत का वर्णन मिलता है।

एकादशी महापुण्या विष्णोः प्रियतमा तिथिः ।
संसेव्या सर्वथा विप्रैः संसारच्छेदलिप्सुभिः ॥

संदर्भ: नारद पुराण, पूर्वार्ध, अध्याय 23, श्लोक 11

श्लोक का सरल अर्थ

इस श्लोक में कहा गया है कि एकादशी अत्यंत पुण्यदायिनी और भगवान विष्णु को प्रिय तिथि है। जो व्यक्ति संसार के बंधनों से ऊपर उठने की इच्छा रखता है, उसके लिए एकादशी का पालन आध्यात्मिक साधना का माध्यम माना गया है।

यहां एकादशी का अर्थ केवल भोजन न करना नहीं है। इसके साथ इंद्रिय-संयम, भगवान का स्मरण, सात्त्विक आचरण, वाणी पर नियंत्रण और मन को ईश्वर की ओर लगाना भी जुड़ा हुआ है।

6. अजा एकादशी की पूजा विधि

अजा एकादशी के दिन भगवान विष्णु या श्रीहरि के किसी भी स्वरूप की श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है। पूजा में दिखावे से अधिक महत्व श्रद्धा, संयम और सात्त्विक भाव का है।

पूजा की सरल विधि

  1. प्रातःकाल उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें।
  3. भगवान विष्णु को पुष्प, फल और तुलसी दल अर्पित करें।
  4. धूप और दीप से भगवान की पूजा करें।
  5. भगवान विष्णु के मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप कर सकते हैं।
  6. विष्णु सहस्रनाम, भगवद्गीता या विष्णु स्तुति का पाठ किया जा सकता है।
  7. अपनी क्षमता के अनुसार दान, सेवा और जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करें।
  8. रात्रि में भगवान का स्मरण और भजन किया जा सकता है।

7. अजा एकादशी की कथा

अजा एकादशी की कथा-परंपरा राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी हुई मानी जाती है। राजा हरिश्चंद्र सत्य और धर्म के लिए प्रसिद्ध थे, लेकिन उन्हें जीवन में अत्यंत कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा।

कथा परंपरा के अनुसार उन्हें अपने राज्य, परिवार और प्रतिष्ठा तक से वंचित होना पड़ा। परिस्थितियां इतनी कठिन हुईं कि उनके सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया। फिर भी उन्होंने सत्य का मार्ग नहीं छोड़ा।

इसी कठिन समय में अजा एकादशी के व्रत का प्रसंग आता है। कथा के अनुसार व्रत, भगवान की भक्ति और सत्यनिष्ठा के प्रभाव से उनके जीवन की कठिन परिस्थितियां दूर हुईं और उन्हें पुनः सुख, सम्मान और परिवार की प्राप्ति हुई।

कथा का संदेश: अजा एकादशी की कथा का मुख्य संदेश यह है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य, धर्म, संयम और ईश्वर के प्रति विश्वास को नहीं छोड़ना चाहिए।

8. अजा एकादशी व्रत में क्या खाएं?

व्रत की भोजन परंपरा अलग-अलग परिवारों और संप्रदायों में थोड़ी अलग हो सकती है। सामान्य एकादशी परंपरा में अनाज और चावल से परहेज किया जाता है।

✅ व्रत में सामान्यतः लिए जाने वाले पदार्थ

  • फल
  • दूध और दही
  • सात्त्विक और व्रत-अनुकूल खाद्य पदार्थ
  • आवश्यकतानुसार पर्याप्त जल
  • सेंधा नमक का सीमित प्रयोग, यदि आपकी व्रत परंपरा में मान्य हो

❌ किन चीजों से बचें?

  • सामान्य अनाज
  • चावल
  • दालें, यदि आपकी एकादशी परंपरा में निषिद्ध हों
  • मांसाहार
  • मद्यपान
  • तामसिक भोजन
  • अत्यधिक भोजन

9. क्या अजा एकादशी पर चावल खाना मना है?

पारंपरिक एकादशी व्रत में चावल सहित सामान्य अनाज का सेवन नहीं किया जाता। यह धार्मिक व्रत-परंपरा का हिस्सा है।

इसलिए यदि आप पारंपरिक एकादशी व्रत कर रहे हैं तो चावल से परहेज करना चाहिए। हालांकि अलग-अलग संप्रदायों और परिवारों में व्रत के नियमों में कुछ अंतर हो सकता है।

10. क्या अजा एकादशी पर निर्जला व्रत करना जरूरी है?

नहीं। निर्जला व्रत सभी के लिए अनिवार्य नहीं है। व्रत का उद्देश्य शरीर को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि संयम और साधना है।

यदि किसी व्यक्ति की शारीरिक क्षमता कम है, वह वृद्ध है, गर्भवती है, किसी बीमारी से पीड़ित है या नियमित दवाएं लेता है, तो कठोर या निर्जल व्रत करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

11. अजा एकादशी व्रत के Do's और Don'ts

✅ क्या करें?

  • भगवान विष्णु का स्मरण करें।
  • सात्त्विक आहार लें।
  • वाणी और व्यवहार में संयम रखें।
  • क्रोध, विवाद और अनावश्यक तनाव से बचें।
  • दान और सेवा करें।
  • विष्णु मंत्र का जप करें।

❌ क्या न करें?

  • अनावश्यक क्रोध और विवाद न करें।
  • तामसिक भोजन से बचें।
  • मांसाहार और मद्यपान से बचें।
  • व्रत के नाम पर शरीर को अत्यधिक कष्ट न दें।
  • दूसरों की निंदा और अपमान से बचें।

12. अजा एकादशी का ज्योतिषीय महत्व

ज्योतिषीय दृष्टि से तिथि, चंद्रमा, मन और आहार-विहार का संबंध भारतीय परंपरा में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। एकादशी का व्रत इसी कारण केवल धार्मिक अनुष्ठान न होकर मन और इंद्रियों के संयम की साधना के रूप में भी देखा जाता है।

भगवान विष्णु की उपासना को परंपरागत रूप से सात्त्विकता, धर्म, संरक्षण और गुरु-तत्व से जोड़ा जाता है। इसलिए एकादशी के दिन विष्णु मंत्र, ध्यान, पाठ और संयम को आध्यात्मिक उपाय के रूप में अपनाया जाता है।

🔱 कुंडली के अनुसार क्या लाभ माना जाता है?

  • मन को शांत और संयमित करने की साधना के रूप में एकादशी उपयोगी मानी जाती है।
  • नियमित विष्णु उपासना को आध्यात्मिक अनुशासन बढ़ाने वाला माना जाता है।
  • यदि कुंडली में चंद्रमा से संबंधित मानसिक अस्थिरता के संकेत हों, तो ध्यान, मंत्र और सात्त्विक व्रत जैसी साधनाएं पारंपरिक उपाय के रूप में अपनाई जा सकती हैं।
  • गुरु-तत्व और धर्म से जुड़े आध्यात्मिक अनुशासन को मजबूत करने के लिए विष्णु आराधना की जाती है।

हालांकि किसी व्यक्ति की कुंडली में कौन सा उपाय सबसे उपयुक्त होगा, यह केवल एकादशी देखकर तय नहीं किया जा सकता। जन्मकुंडली के लग्न, ग्रहस्थिति, दशा, अंतरदशा, गोचर और संबंधित भावों का अध्ययन आवश्यक है।

13. अजा एकादशी व्रत का वैज्ञानिक दृष्टिकोण

यहां धर्म और विज्ञान के बीच अंतर समझना जरूरी है। विज्ञान अजा एकादशी के धार्मिक या आध्यात्मिक महत्व को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं करता। लेकिन भोजन से कुछ समय का अंतर रखने और intermittent fasting जैसे fasting patterns पर आधुनिक चिकित्सा शोध उपलब्ध हैं।

ऐसे शोधों में कुछ परिस्थितियों में वजन, ऊर्जा सेवन और कुछ metabolic markers पर संभावित लाभ देखे गए हैं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति के लिए एकादशी का कठोर व्रत चिकित्सकीय रूप से लाभकारी ही होगा।

🧠 वैज्ञानिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण बात

एकादशी के एक दिन के धार्मिक उपवास को किसी clinical intermittent-fasting protocol के बराबर नहीं मानना चाहिए। उपवास के प्रभाव व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य, भोजन, नींद, दवाओं और कुल जीवनशैली पर निर्भर करते हैं।

14. किन लोगों को कठोर व्रत से सावधान रहना चाहिए?

व्रत आध्यात्मिक साधना है, प्रतियोगिता नहीं। यदि उपवास से स्वास्थ्य बिगड़ने की संभावना हो तो कठोर व्रत करना उचित नहीं है।

  • गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं
  • बच्चे और बहुत अधिक उम्र के व्यक्ति
  • कम वजन या कुपोषण की स्थिति वाले व्यक्ति
  • मधुमेह या blood sugar की समस्या वाले व्यक्ति
  • नियमित दवाएं लेने वाले व्यक्ति
  • Eating disorder का इतिहास रखने वाले व्यक्ति
  • गंभीर या दीर्घकालिक बीमारी से पीड़ित व्यक्ति

ऐसे मामलों में व्रत का स्वरूप तय करने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह लेना उचित है।

15. अजा एकादशी को केवल उपवास न बनाएं

अजा एकादशी का वास्तविक भाव केवल यह नहीं है कि पूरे दिन भोजन नहीं करना है। यदि भोजन का त्याग कर दिया लेकिन मन में क्रोध, अहंकार, द्वेष और अशांति बनी रही, तो व्रत का आध्यात्मिक उद्देश्य अधूरा रह जाता है।

इसलिए इस दिन अपने व्यवहार पर भी ध्यान देना चाहिए। कम बोलना, विवाद से बचना, भगवान का स्मरण करना, जरूरतमंद की सहायता करना और अपने भीतर के दोषों पर विचार करना एकादशी साधना को अधिक सार्थक बना सकता है।

16. अजा एकादशी 2026 से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: अजा एकादशी 2026 कब है?

उत्तर: अजा एकादशी 7 सितंबर 2026, सोमवार को है।

प्रश्न: क्या अजा एकादशी 7 अगस्त 2026 को है?

उत्तर: नहीं। 2026 में अजा एकादशी 7 सितंबर को है। 7 अगस्त अजा एकादशी की तारीख नहीं है।

प्रश्न: अजा एकादशी की तिथि कब शुरू होगी?

उत्तर: नई दिल्ली के अनुसार अजा एकादशी तिथि 6 सितंबर 2026 को शाम 7:29 बजे शुरू होगी।

प्रश्न: अजा एकादशी की तिथि कब समाप्त होगी?

उत्तर: नई दिल्ली के अनुसार एकादशी तिथि 7 सितंबर 2026 को शाम 5:03 बजे समाप्त होगी।

प्रश्न: अजा एकादशी का पारण कब होगा?

उत्तर: पारण 8 सितंबर 2026, मंगलवार को किया जाएगा। नई दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग में पारण समय सुबह 6:02 बजे से 10:13 बजे तक दिया गया है। स्थानीय शहर के अनुसार समय में अंतर हो सकता है।

प्रश्न: अजा एकादशी में क्या खा सकते हैं?

उत्तर: व्रत की परंपरा के अनुसार फल, दूध, दही और अन्य व्रत-अनुकूल सात्त्विक पदार्थ लिए जा सकते हैं। सामान्यतः अनाज और चावल से परहेज किया जाता है।

प्रश्न: क्या अजा एकादशी पर चावल खाना मना है?

उत्तर: पारंपरिक एकादशी व्रत में चावल और सामान्य अनाज का सेवन नहीं किया जाता। अलग-अलग परंपराओं में नियम कुछ भिन्न हो सकते हैं।

प्रश्न: क्या अजा एकादशी पर निर्जला व्रत करना जरूरी है?

उत्तर: नहीं। निर्जला व्रत सभी के लिए आवश्यक नहीं है। अपनी आयु, स्वास्थ्य और शारीरिक क्षमता के अनुसार व्रत का स्वरूप चुनना चाहिए।

प्रश्न: अजा एकादशी पर कौन से भगवान की पूजा करनी चाहिए?

उत्तर: अजा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इस दिन श्रीहरि, नारायण या भगवान विष्णु के किसी स्वरूप की पूजा की जा सकती है।

प्रश्न: अजा एकादशी की कथा किससे जुड़ी है?

उत्तर: अजा एकादशी की कथा-परंपरा राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी है। यह कथा कठिन परिस्थितियों में सत्य, धर्म, संयम और ईश्वर-विश्वास बनाए रखने का संदेश देती है।

प्रश्न: क्या अजा एकादशी का कोई ज्योतिषीय लाभ है?

उत्तर: पारंपरिक ज्योतिषीय दृष्टि से एकादशी को मन, इंद्रिय-संयम और भगवान विष्णु की उपासना से जोड़ा जाता है। व्यक्तिगत कुंडली में किसी विशेष ग्रह के लिए उपाय निर्धारित करने के लिए पूरी जन्मकुंडली, दशा और गोचर का अध्ययन करना चाहिए।

प्रश्न: क्या विज्ञान एकादशी व्रत को प्रमाणित करता है?

उत्तर: विज्ञान अजा एकादशी के धार्मिक महत्व को प्रमाणित नहीं करता। हालांकि fasting और intermittent fasting पर वैज्ञानिक शोध उपलब्ध हैं, जिनमें कुछ metabolic और weight-related outcomes पर संभावित लाभ देखे गए हैं।

प्रश्न: स्वास्थ्य समस्या होने पर क्या अजा एकादशी का व्रत छोड़ा जा सकता है?

उत्तर: हाँ। स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। यदि बीमारी, दवा या अन्य स्वास्थ्य कारणों से उपवास जोखिमपूर्ण हो सकता है, तो कठोर या निर्जल व्रत करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

प्रश्न: अजा एकादशी पर कौन सा मंत्र जपना चाहिए?

उत्तर: भगवान विष्णु का “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र श्रद्धापूर्वक जपा जा सकता है। इसके अतिरिक्त विष्णु सहस्रनाम और भगवान विष्णु की स्तुतियों का पाठ भी किया जा सकता है।

🌟 अजा एकादशी का सबसे महत्वपूर्ण संदेश

अजा एकादशी को केवल भूखा रहने का दिन न समझें। इसका वास्तविक भाव संयम, सात्त्विकता, सत्य, भगवान विष्णु का स्मरण, सेवा और आत्मचिंतन से जुड़ा है।

17. निष्कर्ष

अजा एकादशी 2026 में 7 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि 6 सितंबर की शाम से शुरू होकर 7 सितंबर की शाम तक रहेगी और 8 सितंबर को द्वादशी में व्रत का पारण किया जाएगा।

धार्मिक दृष्टि से यह भगवान विष्णु की उपासना, व्रत, संयम और आत्मचिंतन का दिन है। ज्योतिषीय परंपरा में इसे मन और इंद्रियों के संयम तथा सात्त्विक साधना से जोड़ा जाता है। वहीं वैज्ञानिक दृष्टि से fasting पर शोध उपलब्ध है, लेकिन धार्मिक एकादशी व्रत को किसी clinical fasting protocol के समान मानना उचित नहीं है।

इसलिए अजा एकादशी का व्रत अपनी श्रद्धा, पारिवारिक परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार करें। व्रत का उद्देश्य शरीर को कष्ट देना नहीं बल्कि जीवन में अनुशासन, शांति और ईश्वर-स्मरण को बढ़ाना है।

✍️ लेखक परिचय

विवेक मुदगल वैदिक एवं पाराशरी ज्योतिष, तिथि-विचार, मुहूर्त, मेदिनी ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर अध्ययन एवं लेखन करते हैं।

उनका उद्देश्य ज्योतिषीय और धार्मिक विषयों को परंपरागत ज्ञान के साथ सरल, व्यावहारिक और समझने योग्य भाषा में प्रस्तुत करना है।

महत्वपूर्ण सूचना: पंचांग के समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। इस लेख में दिए गए समय नई दिल्ली के आधार पर हैं। धार्मिक अनुष्ठान अपनी पारिवारिक या संप्रदायगत परंपरा के अनुसार करें। स्वास्थ्य संबंधी स्थिति में चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता दें। यह लेख धार्मिक, ज्योतिषीय और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है।

Vivek Virat Mudgal — Founder of ViratAstro
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Vivek Virat Mudgal

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