यह आधी सच्चाई है। शास्त्र कहते हैं कि दोनों जीवनसाथी मांगलिक हों तो दोष परस्पर निरस्त हो जाता है। परंतु यदि एक व्यक्ति का मंगल शुभ ग्रहों से दृष्ट हो या उच्च का हो, तो गैर-मांगलिक से भी विवाह सफल हो सकता है। पूर्ण कुंडली मिलान आवश्यक है।
भौमदोषो भयं नास्ति शुभदृष्टे च लग्नतः।
— यदि लग्न पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो, तो मांगलिक दोष का भय नहीं रहता।
📿 जातक पारिजात, अध्याय 7
हाल ही में एक परिवार आया — बेटी के 12 रिश्ते टूट चुके थे क्योंकि वह 'मांगलिक' थी। मैंने कुंडली देखी — मंगल 12वें में जरूर था, परंतु गुरु की पूर्ण दृष्टि भी थी। तकनीकी मांगलिक, असर नगण्य। मैंने एक गैर-मांगलिक व्यक्ति से विवाह की अनुमति दी — आज वे बहुत सुखी हैं।
विवाह से पूर्व दोनों पक्षों की सम्पूर्ण कुंडली विश्लेषण कराएं — केवल मांगलिक status पर निर्णय न लें। नवांश कुंडली, सप्तम भाव का स्वामी, और दशा क्रम भी देखें।
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