मांगलिक दोष तब बनता है जब जन्म कुंडली में मंगल ग्रह 1, 4, 7, 8, या 12वें भाव में स्थित हो। यह दोष विशेष रूप से विवाह, दांपत्य जीवन और जीवनसाथी के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। हालाँकि शुभ ग्रहों की दृष्टि से इसका प्रभाव कम हो सकता है।
लग्ने व्यये च पाताले जामित्रे चाष्टमे कुजे। भर्तुर्विनाशं कुर्याद्भार्या भर्तुश्च निश्चितम्॥
— यदि कुंडली में मंगल लग्न, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो, तो वह जीवनसाथी के लिए दोषकारक माना जाता है।
📿 बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 80
मेरे 33 वर्षों के अनुभव में मैंने देखा है कि अधिकांश लोग 'मांगलिक' सुनते ही घबरा जाते हैं — परंतु 70% मामलों में या तो दोष आंशिक होता है, या शुभ दृष्टियों से कम हो जाता है, या दोनों ओर से मांगलिक मिलने से स्वतः निरस्त हो जाता है। बिना संपूर्ण कुंडली विश्लेषण के 'मांगलिक' का ठप्पा लगाना उचित नहीं।
मंगलवार को सुबह स्नान के बाद हनुमान चालीसा का पाठ करें। तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पण करें (लाल फूल व चंदन सहित)। 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः' मंत्र का 108 बार जप करें। मसूर की दाल का दान भी विशेष फलदायी है।
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