गुरु (बृहस्पति) सबसे प्रभावी शुभ ग्रह है — यदि वह मंगल पर अपनी दृष्टि डाले, तो दोष लगभग समाप्त हो जाता है। शुक्र और चंद्र भी सहायक होते हैं। पूर्ण निरस्तीकरण के लिए गुरु की पूर्ण दृष्टि (5/7/9वीं) आवश्यक है।
गुरुदृष्टे कुजे दोषो न भवेत् कुलक्षणम्।
— जब गुरु की दृष्टि मंगल पर हो, तो उसका दोष कुल का अहित नहीं करता।
📿 सारावली, अध्याय 12
सबसे ज्यादा सुखद विवाह वे होते हैं जहाँ कुंडली में मंगल पर गुरु की पूर्ण 5वीं या 9वीं दृष्टि हो। ऐसी कुंडली में मांगलिक होते हुए भी जीवन शांत और संपन्न होता है।
यदि गुरु की दृष्टि कमजोर है, तो गुरुवार का व्रत — पीला वस्त्र — केले के पेड़ की पूजा — 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' का जप करें।
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