रसोई का आदर्श स्थान दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) कोण है — क्योंकि यह अग्नि तत्व का स्थान है। गैस चूल्हा पूर्व-मुखी हो (पकाने वाला पूर्व की ओर मुख करे)। पीने का पानी उत्तर-पूर्व में रखें। sink और चूल्हा पास-पास न हों (अग्नि-जल विरोध)। रसोई और शौचालय कभी आमने-सामने न हों।
आग्नेये पाकशाला स्यात् पूर्वाभिमुखमग्निकम्।
— रसोई आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) में हो और चूल्हा पूर्व-मुखी हो।
📿 विश्वकर्मा प्रकाश
हाल ही में फरीदाबाद के एक परिवार की समस्या थी — पत्नी का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा था। visit किया तो रसोई उत्तर-पूर्व में थी (विपरीत स्थान), साथ ही चूल्हा-sink बगल में थे। मैंने सुझाया — रसोई को दक्षिण-पूर्व में shift करें, या अग्नि यंत्र के साथ pyramid लगाएं। 3 महीने में स्वास्थ्य में स्पष्ट सुधार आया।
यदि रसोई का स्थान बदलना संभव नहीं — तो दक्षिण-पूर्व कोने में अग्नि-यंत्र, लाल mirror, या पीले-नारंगी रंग का प्रयोग करें। चूल्हा-sink पास हों तो बीच में wooden divider या copper strip लगाएं।
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