रत्न का चुनाव लग्न (ascendant) के स्वामी और कुंडली में कमजोर/कारक ग्रह के आधार पर होता है — सिर्फ राशि (sun sign) से नहीं। प्रत्येक रत्न एक विशेष ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है (माणिक्य-सूर्य, मोती-चंद्र, मूँगा-मंगल, आदि)। बिना विशेषज्ञ ज्योतिषी की सलाह के रत्न पहनना उल्टा प्रभाव दे सकता है।
रत्नं सुजातं स्फुटितं विशुद्धं ग्रहाणुसारेण फलप्रदं स्यात्।
— शुद्ध, बिना दोष का, सुजात रत्न ही ग्रह-अनुकूल फल देता है।
📿 गरुड़ पुराण (रत्न-अध्याय)
नीलम और हीरा ये सबसे 'खतरनाक' रत्न हैं — गलत स्थिति में पहनने से 24 घंटे में नकारात्मक प्रभाव दिख सकते हैं। मैं हमेशा 5-7 दिन का 'trial period' सुझाता हूँ — रत्न को धागे में बांधकर पहनो, यदि अनुकूल लगे तो ही ring में set कराएं।
कोई भी रत्न पहनने से पहले — पूर्ण कुंडली विश्लेषण कराएं। रत्न का wत्तर्व, धारक की उंगली, धारण-समय और मंत्र — सभी सटीक होने चाहिए। ViratAstro से personal consultation में सही रत्न का निर्धारण होगा।
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