Ask Guruji
Back to Blog
Vivek Mudgal AstrologerVivek Mudgal Astrologer General 8 June 2026 Last updated 8 June 2026

Why Are You Still Struggling Despite Having an Exalted Planet? The Secret of Shadbala in Parashari Astrology

Discover why an exalted planet may fail to deliver results in a horoscope. Learn the concept of Shadbala (sixfold planetary strength) in Parashari Astrology with classical references,

Why Are You Still Struggling Despite Having an Exalted Planet? The Secret of Shadbala in Parashari Astrology

क्या उच्च ग्रह हमेशा शुभ फल देता है? जानिए षड्बल (Shadbala) का रहस्य

क्या आपने कभी सोचा है...

किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु उच्च का है, फिर भी धन नहीं है। किसी की कुंडली में शनि स्वराशि में है, फिर भी करियर में संघर्ष है।

तो क्या केवल उच्च या स्वराशि का ग्रह ही शुभ फल देता है?

महर्षि पराशर का उत्तर है — नहीं।

ग्रह शुभ या अशुभ फल देगा या नहीं, यह केवल उसकी राशि देखकर नहीं बताया जा सकता। सबसे पहले यह देखना होगा कि उस ग्रह में फल देने की शक्ति है भी या नहीं। इसी शक्ति को पराशरीय ज्योतिष में षड्बल (Shadbala) कहा गया है।

PARASHARI SHLOKA
बलाबलं विनिर्णीय ग्रहाणां फलमादिशेत्।
न ह्यबलो ग्रहः सम्यक् फलदः स्यात् कदाचन॥
— ज्योतिषी को पहले ग्रहों की शक्ति और निर्बलता का निर्णय करना चाहिए, उसके बाद ही फलादेश करना चाहिए। क्योंकि निर्बल ग्रह कभी भी अपने पूर्ण फल देने में सक्षम नहीं होता।
📚 बृहद्पाराशर होरा शास्त्र

षड्बल क्या होता है?

"षड्" अर्थात छह, "बल" अर्थात शक्ति। अर्थात ग्रह की छह प्रकार की शक्तियों का कुल योग षड्बल कहलाता है।

जैसे किसी सैनिक की ताकत केवल उसकी वर्दी से नहीं मापी जाती, बल्कि उसके प्रशिक्षण, हथियार, अनुभव और परिस्थिति से भी मापी जाती है। उसी प्रकार ग्रह की ताकत केवल उच्च या नीच होने से नहीं मापी जाती।

एक साधारण उदाहरण से समझिए

पहला डॉक्टर: MBBS, MD (बड़ी डिग्री) लेकिन बीमार रहता है, अस्पताल नहीं जाता और काम नहीं कर पाता।

दूसरा डॉक्टर: केवल MBBS है लेकिन स्वस्थ है, अनुभवी है और प्रतिदिन मरीज देखता है।

अब मरीज का इलाज कौन बेहतर करेगा? स्पष्ट है — दूसरा डॉक्टर। ठीक इसी प्रकार कुंडली में उच्च ग्रह होना बड़ी डिग्री जैसा है। लेकिन षड्बल होना उस ग्रह की वास्तविक कार्य क्षमता है

षड्बल के 6 प्रकार

महर्षि पराशर ने ग्रह शक्ति को छह भागों में विभाजित किया है:

📍 1. स्थान बल (Sthana Bala)

यह ग्रह की स्थिति से मिलने वाला बल है। यदि ग्रह उच्च राशि, स्वराशि, मूलत्रिकोण या मित्र राशि में हो तो स्थान बल बढ़ जाता है। (मंगल मकर राशि में उच्च का हो)।

🧭 2. दिग्बल (Dig Bala)

हर ग्रह एक विशेष दिशा में मजबूत हो जाता है। जैसे सूर्य और मंगल को दशम भाव में पूर्ण दिग्बल प्राप्त होता है। सही दिशा में खड़े योद्धा की शक्ति बढ़ जाती है।

⏳ 3. काल बल (Kala Bala)

समय से मिलने वाली शक्ति। सूर्य, गुरु और शुक्र दिन में बलवान होते हैं। चंद्र, मंगल और शनि रात्रि में बलवान होते हैं।

🔄 4. चेष्टा बल (Cheshta Bala)

यह ग्रह की गति से मिलने वाली शक्ति है। "वक्रग्रहाणां विशेषबलम्" - वक्री ग्रह विशेष शक्ति प्राप्त करते हैं। गुरु या शनि वक्री हो जाएँ तो वे सामान्य से अधिक प्रभावशाली परिणाम दे सकते हैं।

🧬 5. नैसर्गिक बल (Naisargika Bala)

यह ग्रह की जन्मजात शक्ति है। पराशरीय सिद्धांत के अनुसार सूर्य का नैसर्गिक बल सबसे अधिक माना गया है।

👁️ 6. दृष्टिबल (Drik Bala)

अन्य ग्रहों की दृष्टियों से मिलने वाला बल। गुरु या शुक्र की शुभ दृष्टि से बल बढ़ता है, जबकि शनि, मंगल या राहु के तीव्र प्रभाव से बल कम हो सकता है।

सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न: उच्च ग्रह होने पर भी फल क्यों नहीं मिलता?

मान लीजिए कुंडली में गुरु उच्च का है। लेकिन अगर वह शनि से पीड़ित है, सूर्य से अस्त है, षड्बल कम है और दिग्बल नहीं है — तो गुरु पूर्ण शुभ फल नहीं दे पाएगा। ठीक वैसे ही जैसे किसी व्यक्ति के पास डिग्री तो हो लेकिन काम करने की क्षमता न हो।

क्या नीच ग्रह भी अच्छा फल दे सकता है?

हाँ। यदि कोई ग्रह दिग्बल प्राप्त करे, चेष्टा बल प्राप्त करे, शुभ दृष्टि प्राप्त करे और उसका कुल षड्बल अच्छा हो, तो वह अपेक्षा से कहीं बेहतर परिणाम दे सकता है। इसलिए केवल "उच्च" और "नीच" देखकर फलादेश करना अधूरा माना जाता है।

आधुनिक भाषा में षड्बल को कैसे समझें?

कल्पना कीजिए कि ग्रह एक कार है।
राशि उसकी कंपनी है।
भाव उसका रास्ता है।
दशा उसका ड्राइवर है।
लेकिन पेट्रोल क्या है? षड्बल
यदि पेट्रोल ही नहीं होगा तो महंगी से महंगी कार भी नहीं चल पाएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्र: क्या उच्च ग्रह हमेशा अच्छा फल देता है?

उ: नहीं। यदि ग्रह निर्बल हो या बुरी तरह पीड़ित हो तो वह पूर्ण शुभ फल नहीं देगा।

प्र: क्या नीच ग्रह हमेशा बुरा होता है?

उ: नहीं। अन्य बलों (जैसे चेष्टा बल, दिग्बल) के कारण वह अपेक्षा से बेहतर फल दे सकता है।

प्र: क्या बिना षड्बल देखे फलादेश करना सही है?

उ: पराशरीय दृष्टिकोण से ग्रहबल का विचार किए बिना किया गया फलादेश अधूरा माना जाता है।

निष्कर्ष

पराशरीय ज्योतिष हमें सिखाता है कि ग्रह का मूल्यांकन केवल उसकी राशि देखकर नहीं करना चाहिए। उच्च ग्रह होना अच्छी बात है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है कि ग्रह में फल देने की शक्ति कितनी है।

महर्षि पराशर के अनुसार ग्रह की वास्तविक क्षमता का माप षड्बल है। इसलिए किसी भी कुंडली का गहन विश्लेषण करते समय भाव, भावेश, कारक, दृष्टि, दशा और गोचर के साथ-साथ षड्बल का परीक्षण अवश्य करना चाहिए। याद रखिए — ग्रह का पद (उच्च या नीच) नहीं, उसकी शक्ति (षड्बल) उसके फल का वास्तविक निर्धारण करती है।

Vivek Virat Mudgal — Founder of ViratAstro
Author·Founder · ViratAstro

Vivek Virat Mudgal

Vedic Astrologer · Parashari Jyotish Expert · Vastu Consultant

33+ years of dedicated practice in Vedic Astrology & Parashari Jyotish. Featured on News Nation. Trusted by 33,000+ clients across 14+ countries. All articles on ViratAstro are written and reviewed by Acharya Vivek जी to ensure shastra-shudh accuracy.

33+ years experience Featured on News Nation Faridabad, India

Share this article

Need personal guidance?

Talk to Acharya Vivek जी directly

33+ years of Vedic experience. Featured on Zee News, Aaj Tak, ABP News, News18. WhatsApp Acharya जी directly or book a personal consultation.

🔒 100% private · 🪔 33+ years experience · 🌍 14+ countries served

Why Are You Still Struggling Despite Having an Exalted Planet? The Secret of Shadbala in Parashari Astrology