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Vivek Mudgal AstrologerVivek Mudgal Astrologer General 7 June 2026 Last updated 7 June 2026

Somvati Amavasya 2026: Is The Rare Adhik Maas Conjunction Really Inauspicious? Truth Revealed!

Discover the scientific and Vedic truth behind the June 15, 2026 Somvati Amavasya. Is this rare Adhik Maas conjunction really inauspicious? Find out here!

Somvati Amavasya 2026: Is The Rare Adhik Maas Conjunction Really Inauspicious? Truth Revealed!

क्या 15 जून 2026 की अमावस्या सच में अशुभ है? जानिए अधिक मास, सोमवती महासंयोग का वैज्ञानिक और शास्त्रीय रहस्य!

लेखक: विवेक मुद्गल तिथि: 7 जून, 2026 श्रेणी: वैदिक ज्योतिष एवं विज्ञान

जब भी हमारे कैलेंडर में अमावस्या की तिथि आती है, तो आम जनमानस के मन में अनजाने भय और आशंकाओं का दौर शुरू हो जाता है। लोग इसे अंधकार, नकारात्मकता या किसी अशुभ घटना से जोड़कर देखने लगते हैं। लेकिन क्या सनातन परंपरा के ऋषियों ने सचमुच किसी तिथि को पूरी तरह से 'अशुभ' घोषित किया था? बिल्कुल नहीं।

15 जून 2026 को पड़ने वाली अमावस्या केवल एक सामान्य अमावस्या नहीं है। यह अधिक मास में पड़ रही है और साथ ही सोमवार को होने के कारण सोमवती अमावस्या का विशेष योग भी बना रही है। भारतीय परंपरा में जब अमावस्या और सोमवार का संयोग होता है तो उसे अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। यही कारण है कि पुराणों, धर्मशास्त्रों और ग्रंथों में सोमवती अमावस्या का विशेष महात्म्य बताया गया है।

लेकिन इस विषय को केवल धार्मिक दृष्टि से समझना अधूरा होगा। इस तिथि के पीछे खगोलीय विज्ञान, पंचांग गणित, ज्योतिषीय सिद्धांत, पितृ परंपरा और सामाजिक व्यवस्था सभी का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।

15 जून 2026 की अमावस्या का महत्व क्या है?

15 जून 2026 की अमावस्या विशेष है क्योंकि यह अधिक मास में पड़ रही है तथा सोमवार के दिन होने से सोमवती अमावस्या का योग बन रहा है। शास्त्रों में इस दिन तर्पण, दान, जप, विष्णु पूजन, शिव पूजन और पितृ स्मरण का विशेष महत्व बताया गया है।

अमावस्या क्या है? वैज्ञानिक आधार समझिए

अमावस्या तब होती है जब सूर्य और चन्द्रमा एक ही देशांतर (Longitude) पर या उसके निकट आ जाते हैं। उस समय चन्द्रमा का प्रकाशित भाग सूर्य की ओर रहता है और पृथ्वी की ओर उसका अंधकारमय भाग। इसी कारण चन्द्रमा दिखाई नहीं देता। यह पूर्णतः खगोलीय घटना है।

अधिक मास क्यों आता है?

भारतीय पंचांग की गणना के अनुसार, चंद्र वर्ष और सौर वर्ष में एक स्पष्ट अंतर होता है, जिसे संतुलित करना आवश्यक है:

वर्ष का प्रकार सटीक अवधि मुख्य आधार
चन्द्र वर्ष लगभग 354 दिन चन्द्रमा की कलाओं का चक्र
सौर वर्ष लगभग 365.24 दिन पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा

दोनों में लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए भारतीय पंचांग में अतिरिक्त मास जोड़ा जाता है। इसी को अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।

ऋषियों ने अमावस्या को धर्म से क्यों जोड़ा?

आज विज्ञान और धर्म को अलग-अलग विषय माना जाता है। लेकिन प्राचीन भारत में ऐसा नहीं था। ऋषियों ने सूर्य, चन्द्रमा, ऋतुओं और प्रकृति के चक्रों का गहरा अध्ययन किया, फिर उन अवलोकनों को समाज के आचरण से जोड़ा।

अर्थात ऋषियों ने पहले प्रकृति को पढ़ा, फिर जीवन के नियम बनाए। आज हम इसे Research कहते हैं। उस समय इसे धर्म, आचार और जीवन पद्धति के रूप में समाज में स्थापित किया गया।

सोमवती अमावस्या का शास्त्रीय महात्म्य

अमासोमेन संयुक्ता कदाचिद् यदि लभ्यते।
तस्यां सोमव्रतं कुर्यात् कोटियज्ञफलं लभेत्॥
अर्थात: यदि अमावस्या सोमवार के दिन प्राप्त हो जाए तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। इस दिन व्रत, पूजा और धर्मकर्म करने से करोड़ों यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है।
व्याख्या: यहाँ “कोटियज्ञफल” का तात्पर्य आध्यात्मिक महिमा बताना है। शास्त्र यह संकेत करते हैं कि यह तिथि सामान्य दिनों की तुलना में धर्मकर्म के लिए अधिक महत्व रखती है।

पुष्कर योग और अमावस्या

अमा सोमे तथा भौमे गुरुवारे यदा भवेत्।
तदा पुष्कर नाम स्यात् सूर्यग्रहणाधिकम्॥
अर्थ: जब अमावस्या सोमवार, मंगलवार या गुरुवार को आए तो विशेष पुण्यकारी योग बनता है, जिसे पुष्कर योग कहा गया है। इसका पुण्य सामान्य दान-पुण्य से अत्यधिक बताया गया है।

भौमवती अमावस्या का महात्म्य

स्नानदानादि भौमवती अपि सोमवती समा ज्ञेया।
अमावास्या भवेद्यदा भूमिपुत्रे।
जाह्नवी स्नानमात्रेण गोसहस्रफलं लभेत्॥
अर्थ: यदि अमावस्या मंगलवार को हो तो उसे भी विशेष महत्व दिया गया है। ऐसी स्थिति में गंगा स्नान और धर्मकर्म को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है।

सोमवती अमावस्या और पितृ कर्म

ग्रंथों में आगे पितृ शांति के निमित्त कहा गया है:

सोमवारेण संयुक्ता अमावास्या यदा भवेत्।
तत्रानन्तफलं श्राद्धं पितृणां दत्तमक्षयम्॥
अर्थ: जब अमावस्या सोमवार को पड़े, तब किया गया श्राद्ध और पितरों के लिए अर्पित तर्पण अक्षय फल देने वाला माना गया है।
व्याख्या: यहाँ मुख्य भाव पितरों के प्रति कृतज्ञता का है। अमावस्या को उत्सव की नहीं बल्कि स्मरण की तिथि माना गया।

क्या अमावस्या अशुभ होती है?

नहीं। यह सबसे बड़ी भ्रांति है। यदि अमावस्या अशुभ होती तो शास्त्र इस दिन श्राद्ध, तर्पण, दान, जप, विष्णु पूजन और शिव पूजन का विधान नहीं करते। अतः अमावस्या को अशुभ नहीं बल्कि पितृप्रधान तिथि कहना अधिक उचित है।

अमावस्या और अंधकार: एक दार्शनिक दृष्टिकोण

यह दार्शनिक निष्कर्ष शास्त्रों के अध्ययन पर आधारित है। ज्योतिष में सूर्य को 'आत्मा' और चन्द्र को 'मन' का कारक माना गया है। अमावस्या पर चन्द्रमा का प्रकाश लुप्त हो जाता है। इस आधार पर यह विचार सामने आता है कि जब मन का प्रकाश क्षीण हो, तब जीवन बदल देने वाले निर्णयों में सावधानी रखनी चाहिए। संभवतः इसी कारण विवाह, गृहप्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य अमावस्या पर सामान्यतः नहीं किए जाते।

अधिक मास और अमावस्या का संयुक्त महत्व

15 जून 2026 की तिथि में दो विशेषताएँ एक साथ हैं: पहला अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) और दूसरा सोमवती अमावस्या। इसलिए यह दिन विशेष रूप से पितृ तर्पण, विष्णु सहस्रनाम, शिव पूजन, पीपल पूजन, अन्नदान और गौसेवा के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

✅ इस दिन क्या करें?

🔹
पितृ तर्पण: पूर्वजों के निमित्त तर्पण करें।
🔹
पाठ व जप: विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ और महामृत्युंजय जप करें।
🔹
पीपल पूजन: पीपल के वृक्ष का पूजन कर दीपक जलाएँ।
🔹
सेवा व दान: अन्नदान, गौसेवा व जरूरतमंदों की सहायता करें।

❌ क्या न करें?

🔸
मांगलिक कार्य: विवाह, सगाई, मुंडन या गृहप्रवेश आदि संस्कार न करें।
🔸
विवाद व जोखिम: अनावश्यक विवाद और बड़े जोखिम वाले निर्णयों से बचें।
🔸
तामसिक आचरण: इस पवित्र दिन तामसिक भोजन या व्यसनों से पूरी तरह दूर रहें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

15 जून 2026 को कौन सी अमावस्या है?
15 जून 2026 को अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में पड़ने वाली सोमवती अमावस्या है।
सोमवती अमावस्या का महत्व क्या है?
शास्त्रों में इसे तर्पण, दान, जप, व्रत और पितृ स्मरण के लिए अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। इस दिन किए गए शुभ कर्मों का फल अक्षय होता है।
क्या अमावस्या अशुभ होती है?
नहीं। यह पितृकर्म और आध्यात्मिक साधना की विशेष तिथि है। चूँकि इस दिन चंद्रमा का बल कम होता है, इसलिए केवल नए सांसारिक मांगलिक कार्यों की शुरुआत वर्जित होती है।
अधिक मास क्यों आता है?
सौर वर्ष और चन्द्र वर्ष के बीच के लगभग 11 दिनों के अंतर को संतुलित करने के लिए हमारे ऋषियों ने पंचांग में हर तीसरे वर्ष एक अतिरिक्त महीना जोड़ने का नियम बनाया है।
क्या अमावस्या का कोई वैज्ञानिक आधार है?
हाँ। यह पूरी तरह सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी की वास्तविक खगोलीय स्थिति पर आधारित है जब चंद्रमा का अप्रकाशित भाग पृथ्वी की तरफ होता है।
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लेखक के बारे में
विवेक मुद्गल | पराशरीय ज्योतिष शोधकर्ता एवं वैदिक ज्योतिष सलाहकार
विवेक मुद्गल एक प्रतिष्ठित पराशरीय ज्योतिष शोधकर्ता, टीवी डिबेट पैनलिस्ट और वैदिक ज्योतिष सलाहकार हैं। Virat Astro पर प्रकाशित होने वाले उनके सभी लेख प्रामाणिक शास्त्रीय ग्रंथों, पंचांग परंपरा, पराशरीय सिद्धांतों और भारतीय ज्ञान पद्धति के गहन वैज्ञानिक व दार्शनिक अध्ययन पर आधारित हैं।
Vivek Virat Mudgal — Founder of ViratAstro
Author·Founder · ViratAstro

Vivek Virat Mudgal

Vedic Astrologer · Parashari Jyotish Expert · Vastu Consultant

33+ years of dedicated practice in Vedic Astrology & Parashari Jyotish. Featured on News Nation. Trusted by 33,000+ clients across 14+ countries. All articles on ViratAstro are written and reviewed by Acharya Vivek जी to ensure shastra-shudh accuracy.

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