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Vivek Mudgal AstrologerVivek Mudgal Astrologer General 24 May 2026 Last updated 24 May 2026

Purushottam Kamala Ekadashi 2026: Scriptural Significance, Vrat Vidhi, Katha, Remedies & the Secret of Lakshmi’s Blessings

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Purushottam Kamala Ekadashi 2026: Scriptural Significance, Vrat Vidhi, Katha, Remedies & the Secret of Lakshmi’s Blessings

पुरुषोत्तम कमला एकादशी 2026 : शास्त्रीय महत्व, व्रत विधि, कथा, उपाय और लक्ष्मी कृपा का रहस्य

जब पुरुषोत्तम मास आता है, तब सनातन धर्म में भक्ति, जप, तप और दान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इसी पुरुषोत्तम मास में आने वाली “कमला एकादशी” को शास्त्रों ने विशेष रूप से माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की संयुक्त कृपा प्रदान करने वाली एकादशी कहा है।

मान्यता है कि यह व्रत दरिद्रता दूर करता है, मानसिक अशांति कम करता है, पापों का क्षय करता है और जीवन में स्थिर लक्ष्मी का प्रवेश कराता है।

लेकिन शास्त्र केवल धन की बात नहीं करते। वे कहते हैं — “धर्मयुक्त लक्ष्मी” ही स्थायी होती है।

पुरुषोत्तम मास क्या है? शास्त्रीय आधार

स्कन्दपुराण का श्लोक

अधिमासो हि लोकेऽस्मिन् पुरुषोत्तमसंज्ञकः ।
सर्वमासेषु पूज्योऽयं विष्णुनाऽभिहितः स्वयम् ॥
सरल अर्थ :
अधिक मास को “पुरुषोत्तम मास” कहा गया है। यह सभी महीनों में श्रेष्ठ और पूजनीय है क्योंकि स्वयं भगवान विष्णु ने इसे अपना स्वरूप कहा है।

शास्त्रीय व्याख्या

पुराणों के अनुसार जब अधिक मास को कोई देवता स्वीकार नहीं कर रहा था, तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम “पुरुषोत्तम” देकर सर्वोच्च स्थान प्रदान किया।

इसी कारण इस मास में किया गया —

  • जप
  • तप
  • दान
  • व्रत
  • हरिनाम स्मरण

विशेष फलदायी माना गया है।

कमला एकादशी का शास्त्रीय महत्व

पद्मपुराण का प्रमाण

एकादश्यां तु या भक्त्या कमलां पूजयेद्धरिम् ।
सर्वपापविनिर्मुक्तो विष्णुलोकं s गच्छति ॥
अर्थ :
जो भक्त कमला एकादशी पर श्रद्धा से लक्ष्मी सहित भगवान हरि की पूजा करता है, वह पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक को प्राप्त करता है।

व्याख्या

यहाँ “कमला” माता लक्ष्मी का नाम है। अर्थात यह व्रत केवल उपवास नहीं, बल्कि —

  • लक्ष्मी-नारायण उपासना
  • मन की शुद्धि
  • धर्मयुक्त समृद्धि

का साधन माना गया है।

एकादशी का महत्व इतना बड़ा क्यों माना गया?

बृहन्नारदीय पुराण

न गङ्गा न गया भूयो न काशी न च पुष्करम् ।
न चैव यज्ञतपसा एकादश्याः समं फलम् ॥
अर्थ :
गंगा, गया, काशी, पुष्कर और बड़े यज्ञ-तप भी एकादशी व्रत के समान फल देने वाले नहीं बताए गए।

शास्त्रीय संकेत

एकादशी केवल भोजन न करने का नाम नहीं है। शास्त्र कहते हैं —

  • इन्द्रिय संयम
  • मन का नियंत्रण
  • हरिनाम जप
  • रात्रि जागरण

ही इसका वास्तविक स्वरूप है।

पुरुषोत्तम कमला एकादशी की पूजा विधि

दशमी से क्या करें?

  • सात्त्विक भोजन लें
  • क्रोध और तामसिक भोजन त्यागें
  • ब्रह्मचर्य का पालन करें

एकादशी के दिन

सुबह स्नान करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का पूजन करें।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

क्या करें?

  • तुलसी अर्पित करें
  • घी का दीपक जलाएँ
  • विष्णु सहस्रनाम पाठ करें
  • गीता का पाठ करें
  • रात्रि जागरण करें

कमला एकादशी में कौन-सा दान श्रेष्ठ माना गया?

शास्त्रों में इन दानों को विशेष फलदायी कहा गया है —

  • अन्नदान
  • दीपदान
  • पीले वस्त्र
  • तुलसी सेवा
  • गीता दान
  • गौसेवा

लक्ष्मी कृपा का वास्तविक अर्थ क्या है?

आज लोग लक्ष्मी को केवल धन मानते हैं। लेकिन शास्त्रों में लक्ष्मी का अर्थ है —

  • सद्बुद्धि
  • सौभाग्य
  • शांति
  • धर्मयुक्त धन
  • आध्यात्मिक सम्पन्नता

भगवद्गीता का सिद्धान्त

यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः ।
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम ॥
अर्थ :
जहाँ भगवान कृष्ण हैं, वहाँ श्री (लक्ष्मी), विजय और स्थिर समृद्धि रहती है।

ज्योतिषीय दृष्टि से कमला एकादशी

वैदिक ज्योतिष के अनुसार —

  • विष्णु उपासना गुरु ग्रह को बल देती है
  • लक्ष्मी पूजा शुक्र को शुभ करती है
  • उपवास चन्द्रमा और मन को शुद्ध करता है

किन लोगों को विशेष लाभ?

  • आर्थिक संकट
  • घर में कलह
  • भाग्य रुकना
  • मानसिक तनाव
  • व्यापार में बाधा

पुरुषोत्तम कमला एकादशी पर विशेष शास्त्रीय उपाय

1. तुलसी के पास दीपदान

संध्या समय घी का दीपक जलाएँ।

2. “ॐ श्रीं नमः” जप

108 बार जप करें।

3. विष्णु सहस्रनाम

गुरु और भाग्य बल के लिए श्रेष्ठ।

4. पीली वस्तु दान

गुरु कृपा हेतु चना दाल, हल्दी, पीले वस्त्र दान करें।

क्या केवल उपवास करने से फल मिलता है?

शास्त्र कहते हैं — नहीं।

यदि मन में —

  • क्रोध
  • छल
  • निन्दा
  • अहंकार

हो, तो व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता।

एकादशी का मूल उद्देश्य “मन का उपवास” है।

पुरुषोत्तम कमला एकादशी कथा का आध्यात्मिक संदेश

कमला एकादशी की कथाओं में मुख्य संदेश यह है कि —

  • भगवान केवल बाहरी पूजा नहीं देखते
  • वे श्रद्धा और भक्ति देखते हैं

गरीब, दुखी और पापी व्यक्ति भी यदि सच्चे मन से यह व्रत करे, तो उसका जीवन बदल सकता है।

FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. पुरुषोत्तम कमला एकादशी किस देवी-देवता को समर्पित है?

यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है।

Q2. क्या इस दिन चावल खाना वर्जित है?

हाँ, वैष्णव परंपरा में एकादशी पर चावल त्याग का विशेष नियम बताया गया है।

Q3. क्या बिना निर्जला व्रत के भी फल मिलता है?

हाँ। शास्त्रों में भक्ति और श्रद्धा को मुख्य माना गया है। स्वास्थ्य अनुसार फलाहार किया जा सकता है।

Q4. कमला एकादशी धन प्राप्ति के लिए क्यों प्रसिद्ध है?

क्योंकि “कमला” माता लक्ष्मी का स्वरूप है और यह व्रत धर्मयुक्त स्थिर लक्ष्मी प्रदान करने वाला माना गया है।

Q5. क्या महिलाएँ यह व्रत कर सकती हैं?

हाँ, स्त्री और पुरुष दोनों इस व्रत को कर सकते हैं।

Q6. कमला एकादशी में कौन-सा मंत्र सबसे श्रेष्ठ है?

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
“ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः”

निष्कर्ष

पुरुषोत्तम कमला एकादशी केवल धन प्राप्ति का व्रत नहीं है। यह जीवन में —

  • सात्त्विकता
  • मन की शुद्धि
  • विष्णुभक्ति
  • धर्मयुक्त लक्ष्मी

को स्थापित करने का आध्यात्मिक पर्व है।

शास्त्रों में इसका फल —

  • पापक्षय
  • मानसिक शांति
  • भाग्योदय
  • मोक्ष

तक बताया गया है।

यदि श्रद्धा, संयम और हरिनाम के साथ यह व्रत किया जाए, तो यह केवल एक धार्मिक कर्म नहीं बल्कि जीवन परिवर्तन का माध्यम बन सकता है।

Vivek Virat Mudgal — Founder of ViratAstro
Author·Founder · ViratAstro

Vivek Virat Mudgal

Vedic Astrologer · Parashari Jyotish Expert · Vastu Consultant

33+ years of dedicated practice in Vedic Astrology & Parashari Jyotish. Featured on News Nation. Trusted by 33,000+ clients across 14+ countries. All articles on ViratAstro are written and reviewed by Acharya Vivek जी to ensure shastra-shudh accuracy.

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