Vivek Mudgal Astrologerअधिक मास 2026 (17 मई–15 जून) सिर्फ एक "एक्स्ट्रा महीना" नहीं है, बल्कि समय को बैलेंस करने का एक प्राचीन और वैज्ञानिक सिस्टम है। जानिए क्यों आता है अधिक मास, इसका रियल एस्ट्रोनॉमिकल लॉजिक क्या है, और इस दौरान आपको क्या करना चाहिए — एक सरल और मानव दृष्टिकोण के साथ।

हर चीज़ ज़िंदगी में प्लान की हुई नहीं होती। कभी-कभी प्रकृति खुद हमें एक विराम देती है — बिना पूछे। अधिक मास कुछ ऐसा ही है।
2026 में यह 17 मई से शुरू हो रहा है। कैलेंडर में एक अतिरिक्त महीना जुड़ जाता है, और पहली नजर में लगता है कि यह बस एक धार्मिक अवधारणा है। लेकिन अगर थोड़ा ध्यान से देखें, तो यह एक बेहद ही बुद्धिमान प्रणाली है — जिसमें विज्ञान, खगोलशास्त्र और मानव व्यवहार तीनों का संतुलन दिखता है।
हिंदू कैलेंडर चंद्रमा को फॉलो करता है, जबकि सामान्य कैलेंडर सूर्य पर आधारित है। इसी वजह से हर साल लगभग 10–11 दिन का अंतर आ जाता है।
इस अंतर को संतुलित करने के लिए कभी-कभी एक पूरा महीना जोड़ा जाता है — जिसे अधिक मास कहते हैं।
जब एक पूरा चंद्र माह निकल जाता है और सूर्य किसी नई राशि में प्रवेश नहीं करता, तब वह महीना अधिक मास बन जाता है।
यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि कैलेंडर प्रकृति के साथ तालमेल में रहे।
इस महीने को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह समय रुककर स्वयं को समझने का माना गया है।
यह कोई अशुभ समय नहीं है। बस इसे चिंतन का चरण माना गया है, क्रियान्वयन का नहीं।
थोड़ा धीमा हो जाइए, अपने विचारों को निरीक्षित कीजिए, और अपनी ज़िंदगी को समझने की कोशिश कीजिए।
जैसे लीप ईयर में एक अतिरिक्त दिन जोड़ा जाता है, वैसे ही यहाँ एक पूरा महीना जोड़ा जाता है ताकि कैलेंडर सटीक बना रहे।
कभी-कभी जीवन को आगे बढ़ाने के लिए रुकना ज़रूरी होता है। अधिक मास वही रुकने का एक संरचित तरीका है।
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