नवग्रह और उनका जीवन पर प्रभाव
वैदिक ज्योतिष में नौ ग्रहों - सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु - का मानव जीवन पर गहरा प्रभाव माना जाता है। जब कोई ग्रह कुंडली में अशुभ स्थिति में हो या उसकी दशा चल रही हो, तो ग्रह शांति पूजा करवाना अत्यंत लाभकारी होता है।
सूर्य शांति पूजा
कब करें: जब सूर्य नीच राशि में हो या पीड़ित हो।
लाभ: आत्मविश्वास बढ़ता है, सरकारी कार्यों में सफलता, पिता से अच्छे संबंध।
मंत्र: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
चंद्र शांति पूजा
कब करें: मानसिक अशांति, अनिद्रा, चिंता होने पर।
लाभ: मन शांत होता है, माता से अच्छे संबंध, भावनात्मक स्थिरता।
मंत्र: ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः
मंगल शांति पूजा
कब करें: मंगल दोष, भूमि संबंधी समस्या, विवाह में देरी।
लाभ: साहस बढ़ता है, भूमि लाभ, वैवाहिक जीवन में सुधार।
मंत्र: ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
बुध शांति पूजा
कब करें: व्यापार में नुकसान, बोलने में समस्या, शिक्षा में बाधा।
लाभ: बुद्धि तीव्र होती है, व्यापार में लाभ, संवाद कौशल बढ़ता है।
मंत्र: ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
गुरु (बृहस्पति) शांति पूजा
कब करें: विवाह में देरी, संतान समस्या, शिक्षा में बाधा।
लाभ: ज्ञान, भाग्य, विवाह और संतान सुख।
मंत्र: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
शुक्र शांति पूजा
कब करें: वैवाहिक कलह, सौंदर्य हानि, वाहन समस्या।
लाभ: प्रेम जीवन, सुख-सुविधा, कलात्मक प्रतिभा।
मंत्र: ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
शनि शांति पूजा
कब करें: साढ़ेसाती, ढैय्या, शनि की दशा में।
लाभ: कष्ट निवारण, न्याय, दीर्घायु।
मंत्र: ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
राहु-केतु शांति पूजा
कब करें: अचानक समस्याएं, मानसिक भ्रम, अज्ञात भय।
लाभ: छाया ग्रहों के अशुभ प्रभाव में कमी।
विशेष सलाह: ग्रह शांति पूजा हमेशा अनुभवी पंडित जी से शास्त्रोक्त विधि से करवाएं। सही मुहूर्त और विधि से पूजा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

